धारा 43घ के खंड (ख) के अंतर्गत पब्लिक कंपनी की दशा में डूबंत या शंकास्पद ऋणों की श्रेणियां
6ड़ख. धारा 43घ के खंड (ख) के उपबंध प्रत्येक पब्लिक कंपनी की दशा में वहां लागू होंगे जहां ब्याज के रूप में इसकी आय डूबंत और शंकास्पद ऋणों की निम्नलिखित श्रेणियों से संबंधित है, अर्थात् :--
(क) (i) शंकास्पद आस्ति अर्थात् ऐसा ऋण जो दो वर्ष से अधिक की अवधि के लिए उपखंड (ii) में विनिर्दिष्ट प्रकृति की गैर-निष्पादनकारी आस्ति बना रहता है;
(ii) उपखंड (i) में निर्दिष्ट गैर-निष्पादनकारी आस्ति निम्नलिखित होगी :--
(1) यदि ब्याज की रकम 'पिछले छह मास से देय' रहती है, या किस्त छह मास से अधिक विलंबित है, तो एक वर्ष के पश्चात् आवधिक ऋण;
(2) यदि किराया या अवक्रय किस्त 'पिछले छह मास से देय' है, तो पट्टा किराया या अवक्रय किस्त;
(3) यदि बिल पिछले छह मास से अतिदेय है और असंदत्त रहता है तो क्रय किए गए या मितिकाटा बिल;
(4) अल्प आवधिक ऋण या अग्रिम [उनको छोड़कर जो ऊपर (1), (2) और (3) में उल्लिखित है] के रूप में कोर्इ अन्य प्रत्यय सुविधा यदि ऐसी किसी सुविधा के संबंध में प्राप्त की जाने वाली कोर्इ रकम पिछले छह मास से देय है;
(ख) हानि आस्ति अर्थात् वह ऋण जिसकी हानि के रूप में पहचान की गर्इ है और उसे असंग्रहणीय समझा गया है लेकिन निर्धारिती के खातों में बट्टा खाते नहीं डाला गया है।
स्पष्टीकरण - इस नियम के प्रयोजनों के लिए, कोर्इ रकम 'पिछला देय' तब मानी जाएगी जब वह देय तारीख के पश्चात् तीस दिन तक असंदत्त रहती है।

