भारत सरकार

राजस्व विभाग

वित्त मंत्रालय

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

 

नई दिल्ली, 18 फरवरी, 2021

 

प्रेस विज्ञप्ति

आयकर विभाग द्वारा बेंगलूरू में तलाशी अभियान

आयकर विभाग की ओर से 17.02.2021 को बेंगलूरू और मेंगलूरू में पंजीकृत ऐसी 09 मुख्य न्यासों के खिलाफ जांच और जब्ती अभियान चलाया गया जो मेडिकल कॉलेज सहित शैक्षणिक संस्थान चलाती है। तलाशी कर्नाटक और केरल के 56 विभिन्न स्थानों पर की गई।

तलाशी और जब्ती अभियान के दौरान यह पाया गया कि एनईईटी के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों में पारदर्शी चयन प्रक्रिया को एजेंट/ब्रोकरों के साथ मिलकर न्यासियों और इन मेडिकल कॉलेजों को चलाने वाले कुछ प्रमुख व्यक्तियों और कुछ विद्यार्थियों जिन्होंने एनईईटी परीक्षा में उच्च रैंक प्राप्त की थी,द्वारा भंग किया गया। पहले स्तर पर भ्रष्टाचार यह है कि एनईईटी परीक्षा में कुछ उच्च रैंकिंग प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने राज्य के काउंसलिंग (जिनकी उक्त कॉलेजों में प्रवेश लेने की कोई इच्छा नही थी चूंकि उन्होंने कहीं और प्रवेश ले लिया था या उनको प्रवेश मिल सकता था) के माध्यम से एमबीबीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश लिया, उसके बाद एजेंट/बिचौलियों/कनवर्टरों (जो नियमित सीट को प्रबंधन सीट में रूपांतरित करने की सेवा देते हैं) के साथ मिलीभगत करके कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (केईए) काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान एक मेडिकल कॉलेज में मेडिकल स्ट्रीम में सीट को ब्लॉक किया। उसके बाद, इन विद्यार्थियों को प्रवेश प्रक्रिया से बाहर किया जाता उसके बाद खाली सीटों को कॉलेज प्रबंधन के लिए उपलब्ध कराया जाता। ऐसी सीटों को "स्ट्रे वैकेंसी राउंड" (सीटों को मोप-अप राउंड के बाद खाली छोड़ा जाता या नहीं भरा जाता)। इस राउंड में, सीटों को कॉलेज प्रबंधन की ओर से प्रति व्यक्ति शुल्क/दान के तौर पर बड़ी मात्रा में राशि को एकत्रित करने के बाद कम मेधावी छात्र (एनईईटी में कम रैंक) को प्रवेश देकर भरा जाता जोकि कर्नाटक शैक्षणिक संस्थान (कैपिटेशन शुल्क निषेध) अधिनियम, 1984 के तहत गैर कानूनी है। प्रति व्यक्ति शुल्क/दान इन मेडिकल कॉलेजों के प्रमुख व्यक्तियों/न्यासियों द्वारा ब्रोकर/एजेंट के नेटवर्क के माध्यम से एकत्रित किया जाता है।

तलाशी अभियान से ऐसी नोट बुक, हस्त लिखित डायरी, एक्सेल शीट के रूप में एमबीबीएस, बीडीएस और पोस्ट ग्रेजुएट के लिए प्रवेश हेतु सीट के लिए नकद भ्रष्टाचार से संबंधित असाक्ष्यपूर्ण दस्तावेज की पहचान हुई जिसमें कई सालों के लिए इन कॉलेजों में प्रवेश हेतु विद्यार्थी/ब्रोकरों से प्राप्त नकदी का ब्यौरा शामिल है। यह भी पाया गया कि प्रबंधन, फैकल्टी, स्टाफ, मेधावी छात्र और ब्रोकर ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया में हेराफेरी करने के लिए एक-दूसरे के साथ जुड़े हैं। साथ ही, ऐसे भी प्रमाण हैं जो इशारा करते हैं कि एक मेडिकल कॉलेज में लिखित परीक्षा और मौखिक परीक्षा में प्रबंधन कोटा के विद्याार्थियों को पास करने के लिए कुछ "पैकेज व्यवस्था" भी है जिसकी निश्चित कीमत रू. 1 लाख से रू. 2 लाख तक है।

आगे, ऐसे भी प्रमाण है जो पहले नजर में बताते हैं कि इन कॉलेजों में ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया में हेराफेरी करके प्राप्त की गई नकदी को न्यासियों द्वारा गैर-धर्मांर्थ उद्देश्यों के लिए दी गई जो कि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 12कक का स्पष्ट तौर पर उल्लंघन है। इसके अलावा, अचल संपत्तियों में बड़ी मात्रा में निवेश से संबंधित प्रमाण भी मिले जिसमें बड़े तौर पर नकदी का प्रयोग किया गया जिन पर आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 69 के प्रावधान लागू होते हैं। एक कॉलेज ने टिंबर/प्लाईवुड उद्योगों का अलग-अलग व्यापार किया जहां रसीद से संबंधित प्रमाण भी मिले।

अभी तक, इकट्ठा किए गए प्रमाण बताते हैं कि ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया में हेरफेर करके अवैध कैपिटेशन शुल्क के तौर पर रू. 402.78 करोड़ प्राप्त किए गए हैं और इसे आयकर विभाग को नहीं दिखाया गया है। तलाशी से रू. 15.09 करोड़ की नकदी को जब्त करने में भी मदद मिली है। 81 किग्रा (जिसकी कीमत रू. 30 करोड़ है) के स्वर्ण आभूषण, 50 कैरेट के हीरे और 40 किग्रा के चांदी के सामान को न्यासियों के आवासीय परिसर से प्राप्त किया गया है और प्रथम तौर पर यह अस्पष्ट है। बेनामी नामों पर 35 लक्जरी कारों में बड़ी मात्रा में निवेश के प्रमाण के अलावा घाना में रू. 2.39 करोड़ की अघोषित विदेशी परिसंपत्ति के प्रमाण भी मिले।

आगे, की जांच चल रही है।

 

(सुरभि आहलूवालिया)

आयकर आयुक्त

(मीडिया व तकनीकी नीति)

आधिकारिक प्रवक्ता, सीबीडीटी