भारत सरकार

राजस्व विभाग

वित्त मंत्रालय

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

 

नई दिल्ली, 21 जनवरी, 2021

 

प्रेस विज्ञप्ति

आयकर विभाग द्वारा जयपुर में तलाशी अभियान

 

आयकर विभाग ने तीन समूहों के खिलाफ जयपुर में 19.01.2021 को तलाशी और जांच अभियान चलाया जिसमें एक ज्वैलर और दो रियल एस्टेट कोलोनाइजर और डेवलेपर शामिल हैं। समन्वित तलाशी अभियान 20 परिसरों पर और सर्वेक्षण 11 परिसरों पर चलाया गया था।

इनमें से एक समूह जयपुर में एक प्रसिद्ध बिल्डर, डेवलेपर और कोलोनाइजर है। तलाशी के दौरान, रसीदों के रूप में बड़ी मात्रा में मिले असाक्ष्यपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल डेटा, अस्पष्ट डेवलपमेंट व्यय, अस्पष्ट परिसंपत्तियां, नकदी ऋण व उधार, ऑन-मनी रसीदें मिली और उनको जब्त किया गया। इस जांच अभियान की प्रमुख बात थी कि इस समूह के पिछले 6-7 वर्षों के बेहिसाब लेनदेन का पूर्ण ब्यौरा कई रजिस्टरों, स्लिप पैड, दैनिक कच्ची नकदी बही खाता, व्यय शीट और डायरियों में रखा था जिनको मुख्य व्यापारिक परिसरों से निकाला और जब्त किया गया। इस समूह के खिलाफ जांच में अभी तक रू. 650 करोड़ की राशि के बेहिसाब लेनदेन की पहचान की गई है।

दूसरा समूह कई तरह के व्यापार करने वाला समूह है जो कीमती और अर्द्ध कीमती पत्थरों, आभूषणों, पुराने सामान, हस्तशिल्प, कालीन, कपड़ा आदि का व्यापार करता है। तलाशी अभियान के दौरान, निर्धारिती के मुख्य व्यापारिक परिसर से समूह के अनुकूल प्रयासों की बदौलत गुप्त गड्ढ़ें का पता लगाया गया। उक्त गड्ढ़ें से पिछले 6 वर्षों के दौरान स्वर्ण और चांदी के आभूषणों की बेहिसाब विनिर्माण संबंधी लेनदेन का पूर्ण ब्यौरा मिला। यहां यह ध्यान देना उचित है कि समूह द्वारा इस विनिर्माण गतिविधि का जिक्र दाखिल की गई किसी भी आय विवरणी में कभी नहीं किया गया है। रू. 15 करोड़ से अधिक की बेनामी संपत्ति से संबंधित दस्तावेज भी गुप्त कमरे से मिले।

हालांकि निर्धारिती ने किसी स्टाक रजिस्टर को रखने की बात से इंकार किया, इसे गुप्त गड्ढ़ें से बरामद किया गया। हर चीज पर निर्दिष्ट ऎल्फा-न्यूमैरिक सीक्रेट कोड जिसमेंं वास्तविक बिक्री मूल्य बताया गया था और समूह कोड को सुलझाने का प्रयास कर रहा है। चीजों की फोटोग्राफ के साथ कोडिड रूप में विभिन्न चीजों के ब्यौरे वाले गुप्त गड्ढ़ें से दो हार्ड ड्राइव और पैन ड्राइव भी मिली थी। समूह द्वारा ज्वैल प्राइम सॉफ्टवेयर में निर्धारिती द्वारा सुरक्षित रखे गए गुप्त भेदभावपूर्ण डेटा का भी पता लगाया गया है। इन गैर साक्ष्यपूर्ण दस्तावेजों/डेटा और नियमित बही खातों के अध्ययन से पता चलता है कि निर्धारिती विदेशी पर्यटकों को बेची गई चीजों पर 100 से 150 प्रतिशत तक के बिक्री प्रतिफल को छुपाता रहा है।

ज्वैलर समूह ने विभिन्न व्यक्तियों को रू. 1227.67 करोड़ की राशि के अग्रिम बेहिसाब नकद ऋण भी दिए थे और उसी पर बेहिसाब ब्याज भी कमाया। समूह ने अपने कर्मचारियों और करीगरों के बैंक खातों के माध्यम से अपनी बेहिसाब नकदी को भी समाविष्ट किया। कुल मिलाकर समूह में अभी तक रू. 525 करोड़ की राशि के कुल बेहिसाब लेनदेन का पता लग चुका है।

तीसरा समूह जयपुर का एक प्रसिद्ध बिल्डर और डेवलेपर है जो कमर्शियल सेंटर, फार्म हाउस, टाउनशिप और आवासीय एनक्लेव को विकसित करता है। तलाशी अभियान से खुलासा हुआ कि निर्धारिती समूह ने बही खातों में केवल रू. 1 लाख के निवेश को दर्शाते हुए एयरपोर्ट प्लाजा पर रियल एस्टेट परियोजना को प्राप्त किया जबकि बही खातों में दर्शाई गई परियोजना से संबंधित डब्ल्यूआईपी लगभग रू. 133 करोड़ पाई गई। तलाशी से यह भी पता चला कि निर्धारिती द्वारा चलाई गई विभिन्न सस्ती हाउसिंग योजनाओं से महत्पूर्ण आय की विवरणी में प्रस्तुत नहीं की गई, जिनके पूर्ण दस्तावेज जांच किए गए परिसर से जब्त किए गए थे। समूह ने विभिन्न व्यक्तियों को रू. 19 करोड़ की राशि बेहिसाब नकद ऋण के तौर पर उधार दिए थे और उस पर बेहिसाब ब्याज भी अर्जित किया। इसलिए, अभी तक रू. 225 करोड़ की राशि के कुल बेहिसाब लेनदेन की पहचान कर ली गई है।

कुल मिलाकर, इन 3 समूहों के खिलाफ जाचं और जब्ती अभियान के मदद से रू. 1400 करोड़ से अधिक के बेहिसाब व रिकॉर्ड न किए गए लेनदेन का खुलासा किया जा चुका है।

तलाशी अभियान अभी भी चल रहा है और आगे की जांच प्रक्रियागत है।

 

(सुरभि आहलूवालिया)

आयकर आयुक्त

(मीडिया व तकनीकी नीति)

आधिकारिक प्रवक्ता, सीबीडीटी